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ऑडियोबुक · VoxAudio

परिकथाएँ

साल्तिकोव-श्चेद्रिन, मिखाइल
ऑडियो भाषा: हिन्दी 61 अध्याय
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परिकथाएँ · साल्तिकोव-श्चेद्रिन, मिखाइल

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ऑडियो की भाषा
हिन्दी
अध्याय
61

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मिखाइल साल्तिकोव-श्चेद्रिन की इन व्यंग्य कथाओं में परिकथाओं की परिचित दुनिया मानव समाज का आईना बन जाती है। पशु न्याय पर बहस करते हैं, शक्तिशाली आज्ञाकारिता माँगते हैं और कमजोर लोग सावधानी, सूझबूझ या धैर्य के सहारे जीवन बचाने की कोशिश करते हैं। कल्पना की इन स्थितियों के पीछे शासकों और प्रजा के संबंध, दूसरों के श्रम पर निर्भरता, बदलाव का डर और अन्याय को सही ठहराने की आदत दिखाई देती है। सरल लगने वाली कहानी धीरे-धीरे पात्रों के उन विरोधाभासों को सामने लाती है जिन्हें वे अनदेखा करना चाहते हैं। लेखक लोककथा की शैली को विडंबना, अतिरंजना और सरकारी घोषणाओं की भाषा के साथ जोड़ते हैं। इसलिए हँसी के पीछे अक्सर पीड़ा छिपी रहती है: समझदारी जकड़ देने वाले भय में बदल जाती है, सुंदर शब्द क्रूरता को ढकते हैं और भलाई के वादे असहाय लोगों की दशा नहीं बदल पाते। ये छोटी रूपक कथाएँ अंतरात्मा, गरिमा, श्रम और व्यक्तिगत जिम्मेदारी पर विचार करने का अवसर देती हैं।