इस ऑडियोबुक के बारे में
गोलोव्ल्योव की जागीर पर अरीना पेत्रोव्ना का कठोर शासन है। वह संपत्ति बढ़ाने और उसे परिवार के हाथों में रखने को जीवन का सबसे बड़ा काम मानती है। लेकिन धन और अनुशासन उसके बच्चों को न आपसी विश्वास दे पाते हैं, न जीने का उद्देश्य। विरासत के बँटवारे, पुरानी शिकायतों और स्वार्थ के बीच रिश्ते टूटते जाते हैं। उसका बेटा पोर्फ़िरी, जिसे घर में ‘इयूदुश्का’ कहा जाता है, धर्म और पारिवारिक कर्तव्य की बातें करता है, पर ज़रूरत पड़ने पर अपने ही लोगों की मदद से पीछे हट जाता है।
मिखाइल साल्तिकोव-श्चेद्रिन इस परिवार के पतन में उस ज़मींदार समाज की पड़ताल करते हैं जहाँ अधिकार और धन ने मानवीय संबंधों की जगह ले ली है। तीखे व्यंग्य के साथ उपन्यास यह भी दिखाता है कि खोखले उपदेश किस तरह क्रूरता को ढकते हैं और रोज़मर्रा की बेरुख़ी अकेलेपन में बदल जाती है। यहाँ पारिवारिक त्रासदी का आधार केवल संपत्ति का लालच नहीं, बल्कि दूसरों के दुख को समझने की क्षमता का नष्ट होना भी है।