इस ऑडियोबुक के बारे में
गृहयुद्ध का अगला दौर कात्या, दाशा, इवान तेलेगिन और वादिम रोश्चिन का जीवन गढ़ता रहता है। लंबा अलगाव और बदलती परिस्थितियाँ शुरुआती आशाओं से भविष्य सोचना कठिन बनाती हैं। अनुभवों से बदली दुनिया में रिश्तों को फिर समझना जरूरी है। जो सहा गया उसे केवल किनारे नहीं रखा जा सकता।
अलेक्सेई निकोलायेविच तोल्स्तोय निजी भावना को राजनीतिक प्रतिबद्धता और अपनेपन के प्रश्नों से मिलाते हैं। बड़े संघर्ष की गति के साथ पात्र दिशा खोजते हैं। फैसलों का अर्थ भविष्य के वादे के साथ अतीत के सहन से बनता है। याद चुनावों में सक्रिय रहती है।
त्रयी का समापन उपन्यास निजी तथा ऐतिहासिक समय में निरंतरता और बदलाव देखता है। परिचित चरित्रों का विकास पाठक के साथ चलता है। घर, कर्तव्य और लगाव की समझ जीवन की घटनाओं से कैसे बदलती है, यह प्रश्न उभरता है। संबंध उसी दुनिया में बचते हैं जहाँ उनके पुराने अर्थ परखे जाते हैं।