इस ऑडियोबुक के बारे में
उन्नीस सौ अठारह की उथलपुथल कात्या और दाशा बुलाविना, इवान तेलेगिन तथा वादिम रोश्चिन को ऐसी परिस्थितियों में लाती है जो संबंधों पर दबाव डालती और रास्ते अलग करती हैं। गृहयुद्ध में निजी निर्णय राजनीतिक निष्ठा से जुड़ते हैं। विभाजित देश की यात्रा खबर, सुरक्षा और पुनर्मिलन को अनिश्चित बनाती है।
अलेक्सेई निकोलायेविच तोल्स्तोय प्रमुख पात्रों को संघर्षरत समाज के व्यापक दबाव से जोड़ते हैं। मुलाकातों की व्यावहारिक माँगें पिछली बहसों जैसी नहीं रहतीं। विश्वास कर्म में परखे जाते हैं। संसार की साझा भरोसेमंद समझ टूटने पर भी स्नेह महत्त्वपूर्ण रह सकता है।
त्रयी का दूसरा उपन्यास ऐतिहासिक टूटन में जिम्मेदारी, सहनशीलता और दिशा की खोज देखता है। परिचित ढाँचे कमजोर पड़ें तो व्यक्ति अपने चुनाव कैसे परखे? निजी प्रतिबद्धता अपने से बड़ी शक्तियों की परिस्थितियों में कैसे बनी रहे? व्यापक कथा इन प्रश्नों को अलग जीवनों की गति से अनुभव कराती है।