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शूरवीरों की कहानियाँ पढ़ते-पढ़ते स्पेन का एक साधारण कुलीन व्यक्ति अलोंसो किहानो स्वयं योद्धा बनने का निश्चय कर लेता है। वह अपना नाम डॉन क्विकजोट रखता है और अपने घोड़े रोसिनांते पर सवार होकर कमजोरों की रक्षा करने निकल पड़ता है। वह अपने पराक्रम दुल्सीनेआ को समर्पित करता है। इनाम की आशा में किसान सांचो पांजा उसका साथी बनता है। लेकिन पवनचक्कियाँ दैत्य नहीं हैं और सराय महल नहीं हैं। जिन घटनाओं को डॉन क्विकजोट वीरता दिखाने का अवसर समझता है, वे अक्सर उसके लिए मुसीबत बन जाती हैं।
इन हास्यपूर्ण यात्राओं के बीच दो अलग स्वभाव के लोगों की मित्रता गहरी होती जाती है। सांचो अपने मालिक की कल्पनाओं पर सवाल उठाता है, फिर भी उसका साथ नहीं छोड़ता। डॉन क्विकजोट वास्तविकता को पहचानने में भूल करता है, लेकिन न्याय की उसकी चाह कभी-कभी उन लोगों की निर्दयता उजागर कर देती है जो स्वयं को समझदार मानते हैं। रास्ते में मिलने वाले किसान, सरायवाले और मजाक उड़ाने वाले अमीर लोग स्पेन के समाज के अलग-अलग रूप सामने लाते हैं।
मिगेल दे सर्वांतेस सावेद्रा का यह उपन्यास केवल शूरवीरों की कथाओं का व्यंग्य नहीं है। यह स्वतंत्रता, मानवीय गरिमा और कल्पना की शक्ति पर भी विचार करता है। हँसी के पीछे यह प्रश्न बना रहता है कि दूसरों को कष्ट दिए बिना अपने आदर्शों के प्रति निष्ठावान कैसे रहा जाए।