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गुस्ताव फ्लोबेर का यह ऐतिहासिक उपन्यास पाठक को प्राचीन कार्थेज ले जाता है। प्रथम प्यूनिक युद्ध के बाद भाड़े के सैनिकों का विद्रोह शहर को संकट में डाल देता है। इसी संघर्ष के बीच विद्रोही माथो, हमिलकार की बेटी और देवी तानित की उपासिका सालाम्बो के प्रति आकर्षित होता है। निजी इच्छा ऐसे युद्ध से जुड़ जाती है जिसमें पूरे समाज का भविष्य दाँव पर लगा है।
एक पवित्र आवरण की चोरी धार्मिक विश्वास, सत्ता की महत्वाकांक्षा और प्रेम को ख़तरनाक ढंग से एक-दूसरे से बाँध देती है। लेखक अनुष्ठानों, सेनाओं और विरोधी निष्ठाओं के संसार को सजीव दृश्यों में रचते हैं। प्राचीन परिवेश यहाँ साहित्यिक कल्पना का ऐसा मंच है जहाँ पात्रों के भय और इच्छाएँ तीव्र हो उठते हैं।
व्यापक ऐतिहासिक कथाएँ पसंद करने वाले पाठकों के लिए यह निजी आसक्ति और सामूहिक हिंसा के संबंध की कहानी है। इसमें युद्ध, अधिकार और धार्मिक आस्था एक-दूसरे को लगातार प्रभावित करते हैं।