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जब प्रेमकथाओं में मिलने वाला सुख ही वास्तविक जीवन को परखने का पैमाना बन जाए, तो क्या होता है? गुस्ताव फ्लोबेर एम्मा बोवरी की कहानी के माध्यम से इसी प्रश्न को सामने रखते हैं। पढ़ी हुई कहानियों ने उसके मन में प्रेम से बड़ी अपेक्षाएँ भर दी हैं। चार्ल्स से विवाह और कस्बाई जीवन उसे बेचैन तथा असंतुष्ट छोड़ते हैं। वह सोचती है कि कोई नया संबंध या अधिक विलासपूर्ण जीवन उसकी कमी को पूरा कर देगा।
इन आशाओं के पीछे चलते हुए उसके रिश्ते उलझते जाते हैं और आर्थिक स्थिति कमज़ोर होती जाती है। लेखक व्यक्तिगत निराशा को ऐसे समाज के चित्र से जोड़ते हैं जहाँ प्रतिष्ठा, धन और दिखावे का बड़ा महत्त्व है। उनकी सूक्ष्म शैली एम्मा की आकांक्षाओं और उन्हें बनाए रखने वाले भ्रमों, दोनों को उजागर करती है।
मनोवैज्ञानिक यथार्थवाद और अंतर्विरोधों से भरे पात्र पसंद करने वाले पाठकों के लिए यह उपन्यास प्रेम, अकेलेपन तथा सुख की खोज पर गंभीर विचार का अवसर है।