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गुस्ताव फ्लोबेर इस उपन्यास में फ़्रेदेरिक मोरो की कहानी कहते हैं। प्रांत से पेरिस आया यह युवक प्रेम, कला और सामाजिक सफलता के बड़े सपने देखता है। विवाहित मादाम अरनू के प्रति उसका आकर्षण एक स्थायी आदर्श बन जाता है, जिससे वह अपने बाकी अनुभवों की तुलना करता रहता है। लेकिन गहरी इच्छा और प्रशंसा उसे हमेशा कोई निर्णायक कदम उठाने की शक्ति नहीं देतीं।
उन्नीसवीं सदी के मध्य की फ्रांसीसी उथल-पुथल और 1848 की क्रांति के बीच फ़्रेदेरिक मित्रताओं, सामाजिक मंडलियों, आर्थिक अवसरों और प्रेम संबंधों से गुज़रता है। उसके इरादे बार-बार दुविधा तथा ध्यान भटकाने वाली चीज़ों में खो जाते हैं। इस निजी अनुभव में एक पूरी पीढ़ी की अधूरी आशाएँ भी दिखाई देती हैं।
यह उपन्यास जीवन की कल्पना करने और उसे अपने निर्णयों से आकार देने के अंतर की पड़ताल करता है। मनोवैज्ञानिक सूक्ष्मता, फ्रांसीसी यथार्थवाद और युवावस्था की खोती हुई आकांक्षाओं की कहानियाँ पसंद करने वालों के लिए यह एक समृद्ध रचना है।